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1977 में पहली बार बने विधायक, जानिए कौन हैं केंद्र में मंत्री बनने जा रहे पारस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के मंत्रिपरिषद विस्‍तार (Cabinet Expansion) में बिहार से दो सांसदों को जगह मिलना तय माना जा रहा है। एक हैं जदयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष आरसीपी सिंह (JDU National President RCP Singh) और दूसरे हैं पशुपति कुमार पारस (Pashupati kumar Paras)। पशुपति कुमार पारस हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्‍व रामविलास पासवान के छोटे भाई पारस मूल रूप से बिहार के खगड़‍िया जिले के रहने वाले हैं। छह जून 1957 को जन्‍में पारस ने स्‍नातक तक की शिक्षा ग्रहण की है। वे अलौली से पांच बार विधायक रह चुके हैं।

पहली बार 1977 में वे विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हुए थे। उन्‍होंने जेएनपी उम्‍मीदवार के रूप में जीत हासिल की। इसके बाद लोक दल, जनता पार्टी से विधायक चुने जाते रहे। रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी बनाई तो वे इसके विधायक चुने गए। सन 2019 में लोजपा के टिकट पर सांसद निर्वाचित होने से पहले वे पांच बार विधायक रह चुके हैं। नीतीश कुमार की सरकार में उन्‍होंने पशु एवं मत्‍स्‍य संसाधन विभाग का मंत्री पद संभाला। तीन भाइयों में सबसे छोटे पशुपति कुमार पारस बड़े भाई के साथ राजनीति की बारीकियां सीखते रहे।

राजनीति में अचानक सुर्खियों में पारस तब आए जब उन्‍होंने लोजपा का तख्‍तापलट कर दिया। उन्‍होंने पार्टी के पांच सांसदों के साथ बगावत कर दी। चिराग पासवान को नेता मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद वे लोजपा के अध्‍यक्ष चुने गए। हालांकि इस राजनीतिक घटनाक्रम का पटाक्षेप अभी नहीं हो सका है। क्‍योंकि चिराग पासवान ने खुद को लोजपा का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बताते हुए पारस समेत सभी पांच सांसद को पार्टी से निलंबित कर दिया है। उन्‍होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर लोजपा सांसद के रूप में पारस को केंद्र में मंत्री बनाया जाता है तो वे कोर्ट जाएंगे।

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