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KK पाठक के पदाधिकारी पर गिरी गाज, करोड़ों की संपत्ति का हुआ खुलासा… कर दिया गया निलंबित

Desk : सिवान जिले से खबर है जहां भ्रष्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी मिथिलेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है । बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने अधिसूचना जारी कर सुचना दी है । आपको बता दें कि, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (BSVD) के रडार पर आए मिथिलेश कुमार के सिवान से लेकर राजधानी पटना आवास तक छापेमारी की गई । छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति होने की जानकारी मिली है । छापेमारी में लाखों रुपये कैश बरामद भी किए गए । अवैध वसूली के हिसाब का डायरी भी बरामद किया गया है । करोड़ों रुपये के जमीन, फ्लैट और दो लॉकर समेत कागजात भी बरामद किए गए हैं ।

सीवान से पहले औरंगाबाद में शिक्षा विभाग के डीपीओ रहते मिथिलेश कुमार ने शिक्षकों को पैसे के लिए प्रताड़ित कर वसूली की थी । वहीं औरंगाबाद में पदस्थापन के समय दो शिक्षकों को बर्खास्त करने की कार्रवाई विवादों में भी रहा था । जानकारी के बर्खास्तगी के बाद बहाल हो गए तब दोनों शिक्षकों ने मिथिलेश कुमार के खिलाफ निगरानी से लेकर विभाग के सभी वरीय पदाधिकारी के पास आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत की थी । जिसके बाद शिक्षक रजनीश कुमार के शिकायत पर ही निगरानी ब्यूरो की जांच टीम गठित कर दी गई थी ।2

करोड़ से अधिक की संपत्ति का खुलासा

निगरानी की टीम को उनके पटना और सीवान स्थित आवास तथा कार्यालय से 16.07 लाख रुपये नकद मिले. इसमें सीवान कार्यालय से 2.22 लाख, सीवान स्थित आवास से 11.85 लाख और पटना के कवि रमण पथ स्थित फ्लैट से दो लाख नगद मिले हैं. निगरानी ब्यूरो की टीम को मिथिलेश कुमार के ग्रेटर नोयडा में चार फ्लैट, औरंगाबाद में पांच प्लॉट, पटना में एक फ्लैट और दो प्लॉट के साक्ष्य मिले हैं. जिनकी कीमत करीब 1.88 करोड़ है।शिक्षा विभाग ने सीवान के DEO मिथलेश कुमार के निलंबन का आदेश जारी करते हुए बताया कि, निलंबन काल के दौरान इनकी नियुक्ति क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, मुंगेर प्रमंडल में रहेगी । शिक्षा विभाग ने सीवान डीईओ पर दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं करने, निदेशक, शोध और प्रशिक्षण द्वारा प्रशिक्षण संस्थानों को दिए गए निर्देश में व्यवधान डालने अनुचित मांग आदि का आरोप लगाया है । वहीं आदेश में निलंबित DEO के खिलाफ बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही अलग से प्रारंभ करने की बात कही जा रही है ।

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