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हलाला सर्टिफिकेशन को लेकर बिहार और कर्नाटक में गर्मायी सियासत

क्या है हलाला सर्टिफिकेशन?

सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा यूपी में हलाल सर्टिफाइड उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस प्रतिबंध के बाद ​अब बिहार और कर्नाटक में भी इसकी मांग उठी है। भाजपा नेता हलाला सर्टिफिकेशन वाले उत्पाद को प्रतिबंधित करने के लिए बिहार सीएम को पत्र लिखा है।

हलाला सर्टिफेकेशन के तार देश विरोधी ताकतों से जोड़कर बताते हुए इसे यूपी में बैन किया गया। इस के बाद यूपी के पड़ोसी राज्य बिहार में भी इसकी मांग उठने लगी। बिहार के साथ-साथ कर्नाटक में भाजपा नेताओं इसकी मांग उठाई है। Halala Certification वाले खाद्य पदार्थों, दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों के पर प्रतिबंध की मांग है। बिहार में भाजपा नेता ने नीतीश कुमार को पत्र लिखकर इसपर बैन लगाने की मांग की है।

हलाला सर्टिफिकेशन को लेकर चिट्ठी में किया लिखा है?

Letter to CM Nitish में गिरिराज सिंह ने सर्टिफिकेशन को गलत बताया है। पत्र में कहा गया है कि सर्टिफिकेशन के लिए FSSAI जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं। ऐसे में जिन उत्पादों का इस्लाम से सीधा संबंध नहीं उसके लिए यह गैरवाजिब है। इस तरह के कार्यों से कारोबारों का इस्लामीकरण हो रहा है। इससे उत्पादन कंपनियों को भी खासा नुकसान हो रहा है। इस सर्टिफिकेशन के लिए बड़ी रकम चुकानी पड़ती है। जिसपर कुछ स्वंभू कंपनियों का एकाधिकार है। सरकार को भी इससे कोई राशि प्राप्त नहीं हो रही है।

Halala Certification क्या है?

मुस्लिम समुदाय के लोगों इस्तेमाल करने योग्य उत्पाद।

मुस्लिम हलाल प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करते हैं।

इसमें किसी तरह की मिलावट नहीं है।

इस्लाम में हराम माने जाने वाले जानवर का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

इस्लामी कानून के अनुरूप तैयार किया गया है।

हलाला प्रोडक्ट और सर्टिफेकेशन को लेकर राजनीति फिर से गर्म है। कुछ लोगों की राय है कि भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है। वहीं भाजपा का कहना है कि उनकी मांग कानूनी तौर पर वैध है। यह चुनाव का नहीं बल्की कारोबारों की सुरक्षा और उनके इस्लामीकरण का मामला है।

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