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बिहार में पेट्रोल के बाद डीजल भी शतक लगाने के करीब, ₹96.61 प्रति लीटर तक पहुंची कीमत

पेट्रोल के बाद अब बिहार में डीजल की कीमतें सौ रुपये की दहलीज को पार करने वाली हैं। सोमवार को किशनगंज में डीजल की कीमत 96.61 रुपये तक पहुंच गईं। वहीं पटना में 95 रुपये के नजदीक (94.82) डीजल हो गया है। बीते एक साल में डीजल की कीमत में 16 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। 1 अगस्त 2020 को पटना में डीजल की कीमत 78.72 रुपये प्रतिलीटर थी जो 5 जुलाई 2021 को बढ़कर 94.82 रुपये हो गई। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई बढ़ रही है। सोमवार को पटना में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये प्रतिलीटर के स्तर तक पहुंच गई। जानकारों का मानना है कि बढ़ते डीजल और पेट्रोल की कीमतों से आने वाले दिनों में महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका है।

लगातार बढ़ते डीजल की कीमतों के कारण माल ढुलाई महंगी होती जा रही है। सब्जी, फल और जेनरल आइटमों के व्यापारियों के अनुसार गाड़ियों के भाड़े में पहले ही 15 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है। इस कारण सब्जियों और फलों की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है। सब्जी के थोक व्यापारी राम कुमार साव कहते हैं कि बेंगलुरु, बेलगाम, सहारनपुर, कोटा आदि जगहों से आने वाली सब्जियों की ढुलाई प्रति ट्रक दस हजार रुपये से लेकर बीस हजार रुपये के बीच बढ़ गया है। इस कारण सब्जियों की लागत में बीस से पच्चीस प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा रही है।

फलों की ढुलाई महंगा होने का असर इसकी कीमतों पर भी पड़ा है। आम, पपीता, सेव, अंगूर, मौसम्मी आदि फल इस साल लोगों को तीस से चालीस प्रतिशत तक ज्यादा कीमत देकर खरीदना पड़ी है। बाजार समिति के पटना वेजिटेबल फ्रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद कहते हैं कि भागलपुर से छोटा पिकअप से दो टन आम की ढुलाई में पहले 55 सौ रुपये लगते थे वहीं अब इसपर लगभग दस हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। दो टन पर केवल माल ढुलाई में 45 सौ रुपये बढ़ गया है।

गाड़ियों का किराया भाड़ा बढ़ने के बाद अब कंपनियों से माल ढोने वाले ट्रांसपोर्टर अपना किराया 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ऐसा होने पर दवा से लेकर खिलौना तक दूसरे राज्यों से आने वाले जेनरल आइटम के दामों में भी इजाफा होने की आशंका है। बिहार ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष एमएस भारद्वाज कहते हैं कि अगले एक सप्ताह के अंदर ट्रांसपोर्टरों द्वारा अपना भाड़ा बढ़ाने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। गाड़ी भाड़ा बढ़ने के बाद ट्रांसपोर्टरों की स्थिति ऐसी हो गई है कि यदि उन्होंने अपना भाड़ा कंपनियों से नहीं बढ़ाया तो उन्हें अपना बिजनेस बंद करना पड़ सकता है।

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