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2023 में CM नीतीश का इन नेताओं से रहा 100 का आंकड़ा, ये सभी बड़े नेताओं ने दिया धोखा…देखें List…

Desk: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए 2024 का साल एक तरफ नया साल रहेगा तो वहीं लोकसभा चुनाव को लेकर खास रहेगा । लेकन साल 2023 में कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री का साथ छोड़ा है । जैसे में उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी समेत कई बड़े नेताओं के नाम भी शामिल हैं । बता दें कि, 2023 में नीतीश कुमार का साथ छोड़ने वाले नेताओं में सबसे पहले उपेंद्र कुशवाहा का नाम सामने आता है । हालांकि उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार का साथ छोड़ा और फिर 21 मार्च 2021 को अपनी पार्टी रालोसपा का जेडीयू में विलय कर लिया था । वहीं 2 साल के अंदर ही 20 फरवरी 2023 को उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से फिर इस्तीफा दे दिया था । जिसके बाद नई पार्टी आरएलजेपी बनाई । उपेंद्र कुशवाहा जेडीयू में संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष थे । वह काफी दिनों से नाराज चल रहे थे । उनका सीधा आरोप जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह पर रहा करता था । उपेंद्र कुशवाहा ने लालू यादव के साथ होने को लेकर नीतीश कुमार को कई बार कहा था कि, मुख्यमंत्री डूबती नाव की सवारी कर रहे हैं । मांझी और उनके बेटे महागठबंधन से हो गए थे अलग नीतीश कुमार की पार्टी से नहीं, लेकिन महागठबंधन में शामिल जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन भी अलग हो गए थे । जीतन राम मांझी को नीतीश कुमार ने 20 मई 2014 को बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया था । वही 9 महीने तक जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री रहे । जिसके बाद 20 फरवरी 2015 को मांझी को इस्तीफा देना पड़ा था । खास बात तो यह है कि, इस्तीफे के बाद जीतन राम मांझी ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा नाम से पार्टी बनाई थी । वहीं 2019 में वह फिर से नीतीश कुमार के साथ हो गए । लगातार 2020 के एनडीए की सरकार में शामिल भी रहे । नीतीश कुमार ने अपने कोटे से जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन को मंत्री भी बनाया था । 9 अगस्त 2022 को नीतीश कुमार एनडीए से अलग हुए तो जीतन राम मांझी भी नीतीश कुमार के साथ रहे, लेकिन कुछ महीने बाद से ही नीतीश और मांझी में मतभेद चलने लगा था । अंत में 13 जून 2023 को संतोष सुमन ने मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया और जीतन राम मांझी ने 19 जून को राज्यपाल के पास अपने चार विधायकों के साथ महागठबंधन से अलग होने का पत्र सौंपा था । संतोष सुमन और जीतन राम मांझी ने उस वक्त कहा था कि, हम पर पार्टी को जेडीयू में विलय करने का दबाव बनाया जा रहा था, जो हम नहीं कर सकते थे । हालांकि उस वक्त नीतीश कुमार ने यह कहा था कि, यह लोग इंडिया गठबंधन की बातों को इधर-उधर कर रहे थे । इसलिए हमने ही कहा कि विलय करो या बाहर हो जाओ । इन्होंने भी लगाया था आरोप जेडीयू के एमएलसी और प्रवक्ता रणवीर नंदन पार्टी में वैश्य समाज पर पकड़ रखने वाले पार्टी के प्रदेश महासचिव राजू गुप्ता ने भी साथ छोड़ा था

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