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देश का विलेज ऑफ आईआईटीयंस: बिहार का वह गांव जहां करीब हर घर में मिलेंगे आईआईटीयंस….

Patna: आज हम ऐसे गांव की कहानी बताने जा रहे हैं, जहां के करीब सभी घरों में आईआईटी में चयनित बच्चे मिलेंगे। इसलिए इसे आईआईटी का गांव (विलेज ऑफ आईआईटीयंस) कहा जाता है।

बिहार के गया में स्थित मानपुर का पटवाटोली एक गांव है।जिसे का गांव कहा जाता है। यहां के हर घर से आपको आईआईटीयंस मिलते दिखेंगे। जिस कारण ये गांव हमेशा सुर्खियों में रहता है। यहां के युवा एक-दूसरे से प्रेरणा लेते हैं और उनकी की तरह सफलता हासिल करते हैं। इस गांव को लोग पहले मैनस्टर ऑफ बिहार कहते थे। यहां लूम द्वारा तौलिया, चादर तथा गमझा आदि बनाया जाता था। किंतु आज इस गांव की पहचान कुछ और हो चुकी है। अब इसे विलेज ऑफ आईआईटीयंस कहते हैं।

पटवा टोली में इस बार फिर सफलता का परचम लहराया है। यहां के 45 बच्चे जी-मेंस में सिलेक्ट हुए है। जिसमे से 38 बच्चों ने एडवांस के लिए क्वालिफाइड कर लिया है। शेष बच्चों के अंक 90 प्रतिशत से ऊपर हैं।

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हर वर्ष यहां दर्जनों की संख्या में कैंडिडेट्स चयनित होते हैं, वह भी बिना किसी कोचिंग को ज्वाइन किए। यहां एक लाइब्रेरी की व्यवस्था है जिसमें युवाओं को काफी मदद मिलती है। ये लाइब्रेरी भी युवाओं के मदद द्वारा ही चलता है। सबसे पहले इस गांव से वर्ष 1996 में एक बच्चे ने आईआईटी में दाखिला लिया उसके बाद ये सिलसिला आगे बढ़ता गया।

यहां जो लाइब्रेरी है वहां बच्चे नि:शुल्क पढ़ाई करते हैं। ये लाइब्रेरी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां पर जो बच्चे पढ़ते हैं वह सोनियर्स द्वारा पढ़ते हैं। ये वही सीनियर्स हैं जो आईआईटी में शिक्षा हासिल की हुए हैं। यहां इनकी ऑनलाइन कोचिंग की भी व्यवस्था उपलब्ध करायी गई है।

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