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सामाजिक बदलाव का अभियान बन गया नीतीश कुमार का शराबबंदी कानून 

निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी पर प्रभाव

पटना: शराबबंदी का निर्णय एक सामाजिक अभियान में बदल चुका है। समाज अधिक सशक्त, स्वस्थ एवं संयमी हो रहा है। नागरिकों के स्वास्थ्य में बेहतरी, परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार, पारिवारिक हिंसा, घरेलू कलह एवं सामाजिक अपराध में भारी कमी आई है। समाज में आ रहे बदलावों का कई संस्थानों द्वारा अध्ययन किया गया है।

शराबबंदी के बाद समाज और महिलाओं पर क्या असर हुआ है? क्या महिलाओं में निर्णय में भागीदारी बढ़ी है या समाज में इसका क्या प्रभाव पड़ा है, इन तमाम बातों को जानते हैं।

निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी पर प्रभाव:

परिवारों में पैसे से जुड़े निर्णयों में महिलाओं का नियंत्रण बढ़ रहा है। महिलाओं को उनके सामूहिक अभिकथन के लिए मान्यता दी जाने लगी है। पुरूष अधिक मानवीय और जिम्मेदार हो गए हैं और अब परिवार के प्रति अपने दायित्वों को पहचानने लगे हैं।

मद्य-निषेध के बाद,58 प्रतिशत महिलाएं घरों में निर्णय लेने में ज्यादा प्रभावकारी भूमिका निभा रही हैं।

23 प्रतिशत महिलाएं मानने लगी हैं कि उनका प्रभाव घरों से निकलकर गांव के मुद्दों तक बढ़ गया है। महिलाएं मानती हैं कि मद्य-निषेध एक पहल है जिससे उनके आत्मविश्वास और सामूहिक प्रभावकारिता को बढ़ा दिया है।

गांव के समाज पर संपूर्ण प्रभाव:

मद्य-निषेध के बाद,58 प्रतिशत पुरूष अपना वो समय परिवार के साथ बिता रहे हैं जो वे शराब पीने में गंवा देते थे। बाकी के 33 प्रतिशत पुरूषों ने उस समय का उपयोग काम करने में किया।

78 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि पूर्व में शराब का सेवन करने वाले पारिवारिक सदस्यों के साथ उनकी अंतक्रियाएं बढ़ गई है।

85 प्रतिशत ने माना कि पड़ोसियों से झगड़ा कम हो गया है।

73 प्रतिशत ने कहा कि शादी समारोहों में शराब पीकर होने वाले झगड़ों में कमी आई है।

किशोर व लड़कियों ने अपने घर और पड़ोस में शांति की बात कही। घरों के भीतर पढ़ने का माहौल सुधरा है। उनके पिता उनकी पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने लगे हैं। त्योहारों और शादियों के दौरान छेड़खानी की घटनाएं वास्तव में कम हो गई हैं।

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